बनारस (काशी) यात्रा

Places to visit in Banaras

बनारस… काशी… या वाराणसी। नाम कई हैं, पर मक़सद एक ही – मोक्ष।
काशी सिर्फ एक प्राचीन नगरी नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच का एक जीवंत सेतु है। यहां हर पत्थर में एक कहानी है, हर घाट पर एक रहस्य है, और हर गली में भगवान शिव की उपस्थिति महसूस होती है। मैंने हाल ही में बनारस की यात्रा की, और यह काफी हद तक एक ट्रैवल वीडियो बनाने के लिए और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए ही थी, लेकिन यह एक आत्मिक यात्रा बन गई। इस ब्लॉग में मैं आपके साथ अपना अनुभव साझा कर रहा हूं, साथ ही बनारस घूमने की पूरी गाइड भी दे रहा हूं जिससे आपकी यात्रा आसान और यादगार बने।

बनारस क्यों जाना चाहिए?

बनारस भारत की आध्यात्मिक राजधानी है। यह विश्व के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है, जो 5000 साल से भी अधिक पुराना है। यहां :-
1- काल भैरव मंदिर – बाबा काल भैरव जिनको काशी का कोतवाल कहा जाता है। 
2- काशी विश्वनाथ मंदिर – भगवान शिव का 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक।
3- 84 घाट – जो गंगा नदी के किनारे फैले हुए हैं ।
4- मणिकर्णिका घाट – जहां मृत्यु को मोक्ष माना जाता है ।
5- विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती – जो हर शाम दशाश्वमेध घाट पर होती है
6- संकट मोचन हनुमान मंदिर – इसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी।

लेकिन बनारस सिर्फ इन जगहों तक सीमित नहीं है, यहाँ बहुत से मंदिर ऐसे है जिनके मान्यता बहुत है और बनारस सिर्फ मंदिर या तीर्थ तक ही सिमित नहीं है। यह एक अनुभव है, जो आपको अंदर तक बदल देता है। 

काल भैरव मंदिर

Kaal-Bhairav-Temple-Banaras

कहते हैं कि काल भैरव काशी के कोतवाल हैं, यानी काशी के रक्षक। बिना उनकी इजाज़त के बनारस में ठहरना मुश्किल है। और ऐसा भी कहा जाता है कि यहाँ कहीं भी घूमने से पहले बाबा काल भैरव से इजाज़त लेनी पड़ती है। यह सिर्फ एक मान्यता नहीं, यह एक परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है।

मेरा अनुभव: काल भैरव मंदिर में कैमरा अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। मैं लगभग एक घंटा मंदिर के अंदर रहा कपाट बंद थे, भीड़ नहीं थी, बस शांति थी। उस समय जो ऊर्जा महसूस हुई, वो शब्दों से परे है। मंदिर की दीवारों पर लगे बोर्ड में बाबा भैरव की उत्पत्ति, उनके अधिकार और काशी में उनके महत्व के बारे में विस्तार से लिखा हुआ था। यह जानकारी मुझे और भी आकर्षित कर गई कि कैसे यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि काशी की आत्मा का हिस्सा है।
(बोर्ड आप यूट्यूब वीडियो में देख सकते है नीचे वीडियो सुझाव में दिख जायेगी )
📍 स्थान: काल भैरव मंदिर, विशेश्वरगंज, वाराणसी
समय: सुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (दोपहर में मंदिर के कपाट कुछ देर के लिए बंद किये जाते है)
💡 सुझाव: सुबह जल्दी जाएं कम भीड़ होती है और ध्यान से दर्शन कर सकते हैं

मणिकर्णिका घाट

Manikarnika-Ghat-varanasi

जीवन और मृत्यु का संगम बनारस की यात्रा मणिकर्णिका घाट के बिना अधूरी है। यह वह स्थान है जहां मृत्यु को मोक्ष माना जाता है। यहां चिताएं 24 घंटे जलती रहती हैं यह आग कभी नहीं बुझती। लेकिन यहां मृत्यु को रोया नहीं जाता, यहां इसे मुक्ति माना जाता है। हिंदू मान्यता है कि अगर किसी का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका पर हो, तो उसे मोक्ष मिल जाता है।

मेरा अनुभव: जब मैं मणिकर्णिका पहुंचा, तो मैंने बड़े-बड़े लकड़ी के ढेर देखे और एक के साथ एक जलती हुई चिताएं देखीं। यह दृश्य सोचने पर मजबूर कर देता है सब कुछ नश्वर है। जो आया है, वो जाएगा। 
📍 स्थान: मणिकर्णिका घाट, गंगा नदी के किनारे

काशी विश्वनाथ बाबा

Kaashi-Vishwanath-Mandir

काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और बनारस की एक मुख्य पहचान भी। पहले कभी यहाँ मंदिर जाने के लिए बहुत ही संकरी गलियों में से हो कर जाना पड़ता था लेकिन नए रूप में प्रांगण का उद्घाटन और पूरा पुनर्निर्मित परिसर 13 दिसंबर 2021 को किया गया था। अब विशाल विशाल 4 द्वार बनाये हुए है जो मुख्य मंदिर परिसर के चारों ओर हैं। इससे प्रवेश और निकास आसान हो गया है, और पहले की तरह सिर्फ एक संकरी गली नहीं रह गई।

मेरा अनुभव: मणिकर्णिका की सच्चाई के बाद, जब मैं बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए गया। भीड़ तो काफी थी, मोबाइल जमा करने में भी समय लगा लेकिन जब मैं बाबा विश्वनाथ के सामने पंहुचा, तो कुछ पलों के लिए मेरे मन में कोई विचार नहीं था, कोई सवाल नहीं था।
📍 स्थान: काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट के पास
दर्शन समय: – सुबह 4:00 बजे से रात 11:00 बजे तक (मंदिर कुछ घंटों के लिए बंद रहता है)
💡सुझाव: – मंदिर के अंदर कैमरा/फोन ले जाने की अनुमति नहीं है। सुबह जल्दी या देर शाम को कम भीड़ होती है ऑनलाइन VIP टिकट बुक कर सकते हैं।

नमो घाट

Namo-Ghat-Varanasi

नमो घाट एक आधुनिक घाट है जहां एक विशाल “नमस्ते” की मूर्ति है। यह घाट काफी साफ और सुंदर है, और यहां से गंगा नदी का नजारा अद्भुत है। यहाँ पर छोटे बच्चो के खेलने और रोमांच के लिए विभिन्न प्रकार के झूले है।

गंगा आरती

Varanasi-Banaras-Ganga-aarti

जब पंडितों की आरती शुरू होती है, जब घंटों की आवाज़ गूंजती है, जब दीये की रोशनी गंगा के पानी में नाचती है उस पल कुछ अलग ही होता है। एक ऊर्जा, एक कंपन जो आपको अंदर तक हिला देती है। वहां हज़ारों लोग इकट्ठे होते हैं हर धर्म से, हर देश से लेकिन सब एक ही दिव्य शक्ति के सामने झुके हुए होते हैं। यही तो बनारस का जादू है।
📍 स्थान: दशाश्वमेध घाट
⏰ समय: शाम 6:30 बजे से 7:30 बजे तक (मौसम के अनुसार)
💡 सुझाव: – कम से कम 1 घंटे पहले पहुंच जाएं – नाव से आरती देखना एक अलग अनुभव है।

बनारस में घूमने की अन्य जगहें

1. असी घाट –  सुबह की “सुबह-ए-बनारस” के लिए प्रसिद्ध, यहां सुबह 5 बजे योग और आरती होती है।
2. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) – भारत का एक प्रमुख विश्वविद्यालय, परिसर बहुत बड़ा और सुंदर है।
3. सारनाथ – बनारस से 13 किमी दूर, यहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था।
4. रामनगर का किला – गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित, काशी नरेश का निवास स्थान।

बनारस स्ट्रीट फूड - क्या खाएं?

बनारस सिर्फ आध्यात्मिकता के लिए नहीं, यहां का खाना भी विश्व प्रसिद्ध है!
1. बनारसी कचौड़ी-सब्जी 🥘- सुबह के नाश्ते के लिए परफेक्ट। कचौड़ी गली में सुबह 6 बजे से ही भीड़ लग जाती है।
2. ब्लू लस्सी🥛- 70 साल पुरानी दुकान। 50+ तरह की लस्सी मिलती है। यह सिर्फ लस्सी नहीं – एक अनुभव है। (गोदौलिया के पास, ब्लू लस्सी शॉप)
3. बनारसी पान 🌿- तंबू पान, मगई पान – बनारस में पान एक परंपरा है।
4. टमाटर चाट 🍅- सिर्फ बनारस में मिलती है। घी में पकाई गई, मसाले, पनीर और सेव के साथ।
5. मलइयो 🍨- दूध की मलाई को मीठा करके बनाया जाता है। यह सिर्फ सर्दियों की सुबह में मिलता है।
6. बनारसी ठंडाई – बनारस की ठंडाई विश्व भर में प्रसिद्ध है, यह मुख्यत: 2 तरह की ठंडाई मिलती है।
साधारण ठंडाई – जो बहुत ही ताज़ा और स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है। इसमें दूध, चीनी, और ढेर सारे मेवे जैसे बादाम, पिस्ता, काजू और मगज (तरबूज के बीज) डाले जाते हैं।
भांग वाली ठंडाई
 – बनारस में भांग को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है, इसलिए कई लोग इसे “शिव बूटी” के रूप में भी लेते हैं। साधारण ठंडाई में ही पिसी हुई ताजी भांग की गोलियां मिला दी जाती हैं।
सुझाव :- अगर आपने पहले कभी इसका सेवन नहीं किया है तो अकेले में बिलकुल भी न आजमाये या बहुत ही काम मात्रा में ले (अपने जोखिम पर)
गोदौलिया चौराहा पर ठंडाई की दुकानें सबसे पुरानी और मशहूर हैं।

बनारस कैसे पहुंचें?

Varanasi-Railway-Station

1-हवाई मार्ग ✈️ – लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, शहर से 25 किमी दूर है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
2-रेल मार्ग 🚆– वाराणसी जंक्शन (Varanasi Cantt) मुख्य रेलवे स्टेशन है। – वंदे भारत एक्सप्रेस (दिल्ली से 8 घंटे) , महामना एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस आदि। 
 3-सड़क मार्ग 🚗- दिल्ली से लगभग 800 किमी। बस या कार से आसानी से पहुंच सकते हैं।

निष्कर्ष

बनारस की घाटों में और गलियों में बनारस के बारे में काफी कुछ जान ने को मिल जाता है। काफी जगह भीड़भाड़ वाली है लेकिन अद्भुत। हर गली एक जैसी लगती है, लेकिन हर एक की अपनी कहानी है। 2026 की शुरुवात में दूसरी बार मेरा बनारस जाना हुआ, पहले केवल एक दिन के लिए ही गया था सावन के सोमवार पर जल चढ़ाने के लिए और इस बार जब गया तो शाम होते-होते मैं अपने साथियों से अलग हो गया था। पहले लगा कि यात्रा की पूरी प्लानिंग खराब हो गई। लेकिन फिर… मुझे अहसास हुआ, शायद काशी मुझसे अकेले में मिलना चाहती थी। यह वह पल था जब “Divine Travel Alone” सिर्फ मेरा ब्रांड नहीं रह गया यह एक सच्चाई बन गया।

जब आप अकेले होते हैं, तो आप ज्यादा ध्यान देते हैं। आप हर घंटी की आवाज़ सुनते हैं, हर पंडित के मंत्रों को महसूस करते हैं, और हर गली के कोने में छुपी कहानियों को देखते हैं। मैंने समझा काशी में कोई कभी अकेला नहीं होता। यहां हर कदम पर आपको कुछ न कुछ मिलता है एक मंदिर, एक साधु, एक चाय वाला, या फिर खुद भगवान शिव की उपस्थिति।

मेरे सुझाव में अगर आप काशी जाने का सोच रहे है और अच्छे से अनुभव करना चाहते है तो या तो अकेले जाएं या फिर काम से काम जानो के सात जाये तो आप काशी को अच्छे से समझ पायेंगे और अनुभव कर पायेंगे, हर हर महादेव।
अगर आप पूरी यात्रा का पैकेज लेना चाहते है तो 91-8923888618 पर संपर्क कर सकते है।

सामान्य प्रश्न

बनारस घूमने का सबसे अच्छा समय ?

🌤️ अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहावना रहता है।
❌ अप्रैल से सितंबर – बहुत गर्मी और बारिश होती है।

बनारस में कहां ठहरें?
  • बजट होटल (₹500-1500/रात) – गोदौलिया/दशाश्वमेध घाट के पास – होस्टल (₹149 से शुरू)
  • मिड-रेंज होटल (₹2000-3000/रात) – असी घाट के पास , कैंट एरिया (रेलवे स्टेशन के पास)
  • लग्जरी होटल (₹5000+/रात) – BHU के पास
बनारस के लिये ट्रैवल टिप्स
  • गाइड की जरूरत नहीं, लेकिन पहली बार जा रहे हैं तो कोई लोकल गाइड उपयोगी हो सकता है।
  • नकदी रखें – कुछ छोटी दुकानें UPI/कार्ड नहीं लेती।
  • आरामदायक जूते क्यूंकि बहुत चलना पड़ता है।
  • सम्मान बनाए रखें (मंदिरों और घाटों पर फोटोग्राफी के नियमों का पालन करें)।
बनारस में कितने दिन रुकना चाहिए?

कम से कम 2-3 दिन। मुख्य स्थलों को देखने के लिए यह पर्याप्त है, अच्छे से जानने के लिये , कशी को समझने के लिये महीना तक लग सकता है।

बनारस का विशेष त्योहार ?

देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) – सभी घाटों पर लाखों दीये जलाए जाते हैं।
महाशिवरात्रि – काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा।
सावन माह – देश – विदेश से लोग यहाँ सावन के अवसर पर आते है बाबा विश्वनाथ पर जल चढ़ाने।
मसान होली – मणिकर्णिका घाट पर साधु-संत चिता की राख से होली खेलते हैं। यह बहुत अनोखी और आध्यात्मिक परंपरा है।

क्या बनारस में अकेले घूमना सुरक्षित है?

हां, बनारस बहुत सुरक्षित है। लेकिन रात में अकेले सुनसान गलियों में न जाएं।

क्या काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग होती है?

हां, VIP दर्शन के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।

बनारस में बजट कितना रखें?

₹2000-5000/दिन (होटल, खाना, लोकल ट्रांसपोर्ट मिलाकर)

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