गंगा जी की कहानी

Story of Ganga
Dev Prayag

पौराणिक कथाओ अनुसार, “भागीरथी” नाम “भागीरथ” के कारण रखा गया। भगीरथ प्राचीन भारत के एक राजा थे। वह सूर्य वंश के महान राजा सगर के वंशज और भगवान राम के पूर्वजों में से एक थे। भगीरथ अपने पूर्वजो को ऋषि कपिला के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए, हिमालय में तपस्या करने के लिए चले गए। अपने गुरु त्रिशला की सलाह पर, उन्होंने देवी गंगा को प्रसन्न करने के लिए सालो तक तपस्या की, भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर, देवी गंगा ने भगीरथ से कहा कि अगर वह स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरती हैं, तो उनके वेग की शक्ति को सम्हालना मुश्किल होगा, सभी जगह जल भराव हो जायेगा। देवी गंगा ने भगीरथ को भगवान शिव से सहायता लेने के लिए कहा। 

Gangotri

उनके अतिरिक्त कोई भी उनके वेग की शक्ति को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं था । तब भगीरथ ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया, जिससे अंततः देवी गंगा का नदी के रूप में अवतरण हुआ।

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